व्यंग मत बोलो
काटता है जूता तो क्या हुआ
पैर में न सही सर पर रख डोलो
व्यंग मत बोलो
कुछ सीखो गिरगिट से जैसी साख वैसा रंग
जीने का यही है सही सही ठंग
अपना रंग दूसरों से है अलग तो क्या हुआ
उसे रगड़ धोलो
पर व्यंग मत बोलो
भीतर कौन देखता है बाहर रहो चिकने
यह मत भूलो यह बाज़ार है सभी आये बिकने
राम राम कहो माखन मिश्री घोलो
व्यंग मत बोलो
(यह कविता सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के संकलन से ली गई है)
Wednesday, February 25, 2009
खुदका हित बनता है यदि तो झूठ बोलते जाओ ....
सोच समझकर बोलना भले झूठ हो सत्य
जितना संभव हो सके छिपा सभी लो तथ्य
छिपा सभी लो तथ्य झूठ का दामन पकडो
काम करे जो जितना ही उसको ही रगडो
कहें 'शिशु' सत्यता ना कटु बनाओ
खुदका हित बनता है यदि तो झूठ बोलते जाओ
दोस्त भले दुश्मन बने अपना हित लो साध
सबसे पहले खुद को देखो उसके बाद एकाध
उसके बाद एकाध और वो भी अपने हो
भले इन्ही अपनों की खातिर नाम कई क्यूँ जपने हो
'शिशु' कहें बात है सीधी साधी
साध के अपना हित करो दूसरों की बर्बादी
गाँव गाँव नौबत बजी अच्छो को लो खोज
पकड़ पकड़ लाओ यंहा देता हूँ मै डोज़
देता हूँ मै डोज़ बड़े अच्छे बनते हैं
है कठोर कलयुग फिर भी सच्चे बनाते हैं
'शिशु' कहें शुभ चुनाव की बेला आई
गुंडों और बदमाशों ने यह नौबत बजवाई
अभिनेता नेता बने अभिनय फेंका दूर
जैसे ही कुर्सी मिली वादे हुए कफूर
वादे हुए कफूर राह अभिनय की पकडी
और दूसरे एक संसद की कुर्सी जकड़ी
'शिशु' कहें आज नेता ही अभिनेता पूरे
इसीलिये जनता के वादे रहते सदा अधूरे
जितना संभव हो सके छिपा सभी लो तथ्य
छिपा सभी लो तथ्य झूठ का दामन पकडो
काम करे जो जितना ही उसको ही रगडो
कहें 'शिशु' सत्यता ना कटु बनाओ
खुदका हित बनता है यदि तो झूठ बोलते जाओ
दोस्त भले दुश्मन बने अपना हित लो साध
सबसे पहले खुद को देखो उसके बाद एकाध
उसके बाद एकाध और वो भी अपने हो
भले इन्ही अपनों की खातिर नाम कई क्यूँ जपने हो
'शिशु' कहें बात है सीधी साधी
साध के अपना हित करो दूसरों की बर्बादी
गाँव गाँव नौबत बजी अच्छो को लो खोज
पकड़ पकड़ लाओ यंहा देता हूँ मै डोज़
देता हूँ मै डोज़ बड़े अच्छे बनते हैं
है कठोर कलयुग फिर भी सच्चे बनाते हैं
'शिशु' कहें शुभ चुनाव की बेला आई
गुंडों और बदमाशों ने यह नौबत बजवाई
अभिनेता नेता बने अभिनय फेंका दूर
जैसे ही कुर्सी मिली वादे हुए कफूर
वादे हुए कफूर राह अभिनय की पकडी
और दूसरे एक संसद की कुर्सी जकड़ी
'शिशु' कहें आज नेता ही अभिनेता पूरे
इसीलिये जनता के वादे रहते सदा अधूरे
'शिशु' कहे इसलिए आज से चिकनी चुपडी बोलूँगा.....
कटु सत्य कह देने में कठिनाई बहुत बड़ी होती
और बाद में यह उसके धन की हानि है कर देती
कभी कभी इस कटु सत्य से दोस्त भी दुश्मन हो जाते
और दुश्मनों के मन में हम अपनी छाप बना जाते
पहले के युग में थी अपनी इसकी अलग बड़ी पहचान
आज अगर कटु सत्य सुनाओ आफत में पड़ जाती जान
क्यूंकि कान अब कच्चे हो गए सुनने को तैयार नहीं
कहा कही यदि साथी को तो समझो अब वो यार नहीं
कार्यालय में कटु सत्य तो और भी है आसान नहीं
यदि धोखे से निकल गया तो समझो कोई मान नहीं
'शिशु' कहे इसलिए आज से चिकनी चुपडी बोलूँगा
भले देख लूं आखों से मगर सत्य न बोलूँगा
और बाद में यह उसके धन की हानि है कर देती
कभी कभी इस कटु सत्य से दोस्त भी दुश्मन हो जाते
और दुश्मनों के मन में हम अपनी छाप बना जाते
पहले के युग में थी अपनी इसकी अलग बड़ी पहचान
आज अगर कटु सत्य सुनाओ आफत में पड़ जाती जान
क्यूंकि कान अब कच्चे हो गए सुनने को तैयार नहीं
कहा कही यदि साथी को तो समझो अब वो यार नहीं
कार्यालय में कटु सत्य तो और भी है आसान नहीं
यदि धोखे से निकल गया तो समझो कोई मान नहीं
'शिशु' कहे इसलिए आज से चिकनी चुपडी बोलूँगा
भले देख लूं आखों से मगर सत्य न बोलूँगा
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