क्षमा करो श्रीमान... जान अज्ञानी मुझको मान...
क्षमा करो श्रीमान... जान अज्ञानी मुझको मान...
सही कहा इसलिए चल दिए लेकर तीर-कमान...
क्षमा करो श्रीमान... जान अज्ञानी मुझको मान...
बड़बोलापन दिखता मुझमे कुछ ऐसा ही लो मान...
अबसे राय नहीं दूंगा मैं इतना भी लो जान...
क्षमा करो श्रीमान... जान अज्ञानी मुझको मान...
मैं हूँ तुक्ष जीव इस युग का आप हैं बहुत महान...
आप हैं इन्द्र का इन्द्रासन जी हम हैं मीन सामान...
क्षमा करो श्रीमान... जान अज्ञानी मुझको मान...
आप दूध से धुले हुए हैं हम कोयले की खान...
मैं क्या हूँ? औकात क्या मेरी? मेरी नन्ही जान...
क्षमा करो श्रीमान... जान अज्ञानी मुझको मान...
क्षमा करो श्रीमान... जान अज्ञानी मुझको मान...
क्षमा करो श्रीमान... जान अज्ञानी मुझको मान...
Wednesday, March 31, 2010
मेहनत-मजदूरी है पेशा वे असली श्रमशक्ति के दूत....
बरसाती-गंदी-नाली के कीड़े वो जन कहलाते हैं.
जो जीवनभर कठिन कार्य कर जीवन कठिन बिताते हैं.
मेहनत-मजदूरी है पेशा वे असली श्रमशक्ति के दूत.
कार्य कुशलता दिखती उनमे वे भारत के असली पूत.
भले नहीं हों पढ़े-लिखे पर वे रखते सामाजिक ज्ञान.
मेहनत-मजदूरी करके वे रखते हैं परिवार का ध्यान.
श्रद्धा से मस्तक झुक जाता जब भी देखूं उनका काम.
दुःख होता सुन कठिन परिश्रम का मिलता उनको कम दाम.
पढ़े-लिखों से विनती 'शिशु' की उनका भी रखो सब ध्यान,
उनके बारे में भी सोचो, उनका सभी करो सम्मान...
उनका सभी करो सम्मान...
जो जीवनभर कठिन कार्य कर जीवन कठिन बिताते हैं.
मेहनत-मजदूरी है पेशा वे असली श्रमशक्ति के दूत.
कार्य कुशलता दिखती उनमे वे भारत के असली पूत.
भले नहीं हों पढ़े-लिखे पर वे रखते सामाजिक ज्ञान.
मेहनत-मजदूरी करके वे रखते हैं परिवार का ध्यान.
श्रद्धा से मस्तक झुक जाता जब भी देखूं उनका काम.
दुःख होता सुन कठिन परिश्रम का मिलता उनको कम दाम.
पढ़े-लिखों से विनती 'शिशु' की उनका भी रखो सब ध्यान,
उनके बारे में भी सोचो, उनका सभी करो सम्मान...
उनका सभी करो सम्मान...
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