Wednesday, November 26, 2008

तुम कहते हो, तुम्हारा कोई दुश्मन नहीं है!

तुम कहते हो, तुम्हारा कोई दुश्मन नहीं है,
अफसोस?
मेरे दोस्त,
इस शेखी में दम नहीं है
जो शामिल होता है फर्ज की लड़ाई मे,
जिस बहादुर लड़ते ही हैं,
उसके दुश्मन होते ही हैं
अगर नहीं है तुम्हारे,
तो वह काम ही तुच्छ हैं,
जो तुमने किया है,
तुमने किसी गद्दार के कूल्हे पर वार नहीं किया है।
- भगत सिंह (ये कविता भगत सिंह एक जीवनी से ली गई है)

4 comments:

मोहन वशिष्‍ठ said...

बहुत अच्‍छी कविता है भावपूर्ण बधाई इसे पढवाने के लिए

"अर्श" said...

bahot khub likha hai aapne.. badhiya rachana......

परमजीत बाली said...

बढ्या रचना प्रेषित की है।आभार।

omesh meena said...

bhai ye kavita bhagat singh ki nahi h ye kavita original main scotish poet ne likhi hain jo aise h
No Enemies?
You have no enemies you say ?
Alas! my friend the boast is poor;
He who has mingled in the fray
of duty, that the brave endure,
Must have made foes! If you have none,
small is the work you have done.
You've hit no traitor on the hip,
You've dashed no cup from perjured lip,
You've never turned the wrong to right,
You've been a coward in the fight.

--Charles Mackay
neway thnks for u spreading such nyc thoughts i want to b friend of u
omesh meena
971868742