Saturday, November 29, 2008

आतंक, दहशतगर्दी वो सिर्फ़ जेहाद के लिए करते हैं.....

इस समय जो परिस्थिति है
हमारे देश की जो स्थिति है
वही हमारे पड़ोसी मुल्क की है
फिर भी उसके दिमाग की बत्ती गुल है

हम परेशान हैं कि हर बार की तरह इस बार भी,
हमारे देश को ही क्यूँ चुना?
वो भी हैरान हैं कि हर बार की तरह इस बार भी,
हमारे देश का ही नाम क्यूँ चुना?

वो कहते हैं कि हमारे देश को बदनाम क्यूँ करते हो?
हम कहते हैं कि हमारे देश में ही क्यूँ तुम यह काम करते हो?
वो कहते हैं कि हमें पता नही कि दहशतगर्द कंहा रहते,
हम कहते हैं कि एक बार आने दो हमें,
हम पता कर लेंगे कि वो कंहा - कंहा नही रहते!

आतंक, दहशतगर्दी वो सिर्फ़ जेहाद के लिए करते हैं
हम बार बार उनसे प्रार्थना करते हैं
क्या खुदा इसी से खुश होगा?
तुम्हे इसके बदले दुआ में क्या - क्या देगा?

अब इससे पहले खुदा उन्हें कुछ दे
हम प्रार्थना के बदले उन्हें मौत देंगे
'शिशु' इस देश की बात नही करते
पुरे विश्व में दहशतगर्दों को सख्त सज़ा देंगे

6 comments:

Suresh Chandra Gupta said...

आतंक, दहशतगर्दी को जिहाद कहना उचित नहीं है. जिहाद ख़ुद के ख़िलाफ़ किया जाता है - झूट, हिंसा, नफरत, बेईमानी जैसे कितने मुद्दे हैं जिनके ख़िलाफ़ जिहाद किया जाता है. आज कल जिहाद कौन करता है? जिहाद के नाम पर आतंक मचाते हैं, जो अल्लाह के ख़िलाफ़ अपराध है.

नारदमुनि said...

good luck. narayan narayan

हिमांशु said...

जेहाद के नाम पर पागलपन ईश्वर की दृष्टि में और भी बड़ा अपराध हो जायेगा.

We hate Pakistan said...

जिहाद के नाम पर ये फैलाता है जूनून

मासूमों का खून बहाकर पाक को सुकून


आप भी, अपना आक्रोश व्यक्त करे

http://wehatepakistan.blogspot.com/

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया व सामयिक रचना है।बधाई।

Sudhir K. Rai said...

शिशु भाई !
आप के लिए यह चाँद पक्तिया लिही है >>>>

है बुलंद इरादे असमानों से ,
चल पड़े टकराने तोफानो से !
जब आग जली ली सीने में,
फिर क्या घबराना ज़माने से !
नज़र नज़र का फेर नही,
कलम का यह अनमोल नजराना है
जलने जलाने की बात है क्या ,
शिशु तो ख़ुद एक परवाना है !!



शुभकामनाओं सहित

सुधीर