Thursday, October 15, 2009

सभी हादसे भूल गए हम फिरसे दीप जलाएंगे..,


सभी हादसे भूल गए हम फिरसे दीप जलाएंगे।

आशाएं हों जीवन में,
मानवता हो हर मन में,
बैर-भाव न हो मन में,
ऐसे गीत ही गायेंगे...
सभी हादसे भूल गए हम फिरसे दीप जलाएंगे।

रोशन हो सब हर घर द्वार,
भव से हो जाएँ सब पार,
नही कहीं हो मारा-मार,
ऐसे भाव ही लायेंगे...
सभी हादसे भूल गए हम फिरसे दीप जलाएंगे।

हे प्रभु! हे अल्ला! हे ईश!
ऐसी तुम देना आशीष,
बैर न हो मन में जगदीश,
सबको गले लगायेंगे...
सभी हादसे भूल गए हम फिरसे दीप जलाएंगे।

हो सबकी दीवाली अच्छी,
झूठ न बोलें, बोलें सच्ची,
रहे भावना हरदम अच्छी,
'शिशु' तभी मिठाई खायेंगे...
सभी हादसे भूल गए हम फिरसे दीप जलाएंगे।

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