Friday, August 21, 2009

सबसे ख़तरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नही होती*
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नही होती
गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नही होती

बैठे-बिठाये पकड़े जाना-बुरा तो है
सहमी सी चुप में जकड़े जाना-बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नही होता

कपट के शोर में -
सही होते हुए भी दब जाना-बुरा तो है
किसी जुगनू के लौ में पढ़ना-बुरा तो है
मुट्ठियाँ भींचकर वक्त निकाल देना-बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नही होता

सबसे ख़तरनाक होता है-
मुर्दा शान्ति से मर जाना
न होना तड़प का, सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौट कर घर आना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना

*यह कविता विश्व विख्यात कवि श्री अवतार सिंह संधू 'पाश' (जिनकी खालिस्तान के उग्रवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी) के कविता संग्रह से ली गयी है!

Thursday, August 20, 2009

गाँव छोड़ गए गुड्डू राना अब फिल्मो में आयेंगे

गाँव छोड़ गए गुड्डू राना अब फिल्मो में आयेंगे
अपने साथ नाम गाँव का वो रोशन करवाएंगे

चार दिनों से अखबारों में गुड्डू राना ही आते
आज फ़ोन से पता चला है चाचा जी हैं फरमाते

गाँव-पड़ोस ख़बर है फ़ैली सुनकर खुशी मनाते लोग
कौन बनेगी हीरोईन अब यही दिमाग लगाते लोग

दुश्मन सब गुड्डू राना के झूठी ख़बर जानते हैं
धारावाहिक में आएगा केवल यही मानते हैं

दोस्त सभी गुड्डू राना के फूले नही समाते हैं
सुबह शाम या रात कभी हो जमकर खुशी मनाते हैं

'शिशु-भावना' ने भी आज पोस्ट कार्ड में लिख डाला
लिखा गाँव आकर गुड्डू तुमको पहनाएंगे माला

Wednesday, August 19, 2009

धनीराम कुछ भी कहता हो सत्य मार्ग ही चुनना

मैं ही घर में, मैं ही बाहर,
मेरा ही रुतबा चलता है
राह में रोड़ा जो अटकाता
उस पर तब कोडा चलता है

बोल रहा है धनीराम ये
धंधा मैंने ही फैलाया
मत भूलो तुम सब नौकर हो
पैसा मेरे ही है लाया

काम करोगे मन से मेरे
तब तनख्वाह बढ़ाऊंगा
नही समझ लो तुम सबको
मैं घर से अभी भगाऊंगा

एक बात तुम गांठ बाँध लो
मुझसे पार न पाओगे
कहीं भूल से खोल दिया मुंह
औंधे मुंह गिर जाओगे

हाथी कितना ही बूढा हो
भैंस बराबर रहता है
ऐसा मैंने नही कहा है
जग सारा ये कहता है

'शिशु' कहें लेकिन तुम यारों
अपने दिल की तुम सुनना
धनीराम कुछ भी कहता हो
सत्य मार्ग ही चुनना

सच कड़वा या जानलेवा !!

'सच का सामना' अब
जानलेवा साबित हो रहा है
कम से कम अखबारों में तो
यही लिखा आ रहा है
बात सही है!
पर ऐसा मै नहीं मानता हूँ,
सच कड़वा होता है
मै तो बस यही जानता हूँ,
फिर मजबूर हो जाता हूँ
कि अखबार सही कह रहे हैं
क्यूंकि आजकल गंगा और जमुना
एक ही सीध में बह रहे हैं।
एक चीज और जो
मुझे पता चली है कि
अखबारों में वही छपा-छपाया आता है
जो कि मोटी रकम देकर
लिखवाया जाता है
बुद्धिजीवी कहते हैं
ऐसा इसलिए लिखवाया जाता है
ताकि प्रोग्राम पापुलर करके
जनता को भरमाया जाता है
पर 'शिशु' आपको
इससे क्या फर्क पड़ता है?
आपतो गधे के साथ जड़ हो
आपकी बुद्धि में भी जड़ता है

Monday, August 17, 2009

इंतज़ार है शत्रु उस पर कर न यकीन....

इंतज़ार है पक्का शत्रु, उस पर कर न यकीन
जीना शान से चाह रहे तो ख़ुद को समझ न दीन
ख़ुद को समझ न दीन काम कल पर ना छोड़ो
लगन से करके काम दाम फल समझ के तोड़ो
इंतज़ार का फल मीठा है ऐसा कहते लोग
इंतज़ार कब तक करें ? क्या जब बढ़ जाए रोग
जब बढ़ जाता रोग तब इलाज़ महंगा हो जाता
इंतज़ार जो करवाता है तब उसके समझ में आता
'शिशु' कहें दोस्तों मेहनत से मत घबराना
इंतज़ार है शत्रु उसे तुम पास न लाना

Friday, August 14, 2009

जन्म दिवस है आज प्रभु का मना रहे नर-नारी

लिया जेल अवतार कृष्ण ने भक्तों के हितकारी
जन्म दिवस है आज प्रभु का मना रहे नर-नारी

श्याम सलोने कहलाते हैं, मीरा के हैं मोहन
सूरदास के नटखट-नटवर नन्दलाल के सोहन
ग्वाल-बाल के सखा सलोने, माखन चोर मुरारी
जन्म दिवस है आज प्रभु का मना रहे नर-नारी

दुर्जन, दुष्ट सभी भय खाते, अर्जुन के रथ चालक
द्रुपद सुता की लाज बचाई साधु-संत के पालक
गीता ज्ञान दिया रण भीतर तुम पर जग बलिहारी
जन्म दिवस है आज प्रभु का मना रहे नर-नारी

न्याय मिलेगा खुद लड़ने से दुनिया को बतलाया
कर्म करो फल मिल जाएगा, ये सब को समझाया
यही समझ ना आया हमको बुद्धि हमारी हारी
जन्म दिवस है आज प्रभु का मना रहे नर-नारी

'शिशु' कहें है यही 'भावना' आस लगाता जाता
कष्ट हरो जग, जीवन भर के बलदाऊ के भ्राता
शांति सुखी जीवन को सबका जग तुम पर बलिहारी
जन्म दिवस है आज प्रभु का मना रहे नर-नारी

लिया जेल अवतार कृष्ण ने भक्तों के
हितकारी
जन्म दिवस है आज प्रभु का मना रहे नर-नारी

Thursday, August 13, 2009

अजीब पहेली बन गयी जिंदगी

अजीब पहेली बन गयी जिंदगी
उन्हें हम पर भरोसा नही
हमें उन पर भरोसा नही
फिर भी जी रहे हैं साथ-साथ
एक-दूसरे के भरोसे !

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