Tuesday, November 3, 2009

'शिशु' कहें गाँव की बड़ी याद सताती...

मन करता है गाँव को जाऊं, खेलूँ अट्टी-डंडा
शकरकंद संग मट्ठा पियूँ रस गन्ने का ठंडा
रस गन्ने का ठंडा और ईख के खेत को जाऊं
बैठ के खेत मचान जी भर कर गन्ने खाऊं
'शिशु' कहें गाँव की बड़ी याद सताती।
दिन हो या फिर रात बराबर मुझे सताती।

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