कश्मीरी जनता है किसकी?
कौन है उनका भाग्य-विधाता?
प्रथ्वी के इस स्वर्गलोक का
कौन है उनका असली दाता?
हिन्दुस्तान सदा से कहता,
हाथ से जाने नहीं कश्मीर देंगे.
पाक भी आए दिन रटता है,
छीन भारत से हम कश्मीर लेंगे.
आये दिन वार्ता होती पर
अब तक मसला वैसा ही है.
नेहरू-जिन्ना ने छोड़ा था
जैसे का तैसा ही है.
दंगे होते हैं आये दिन,
मरती जनता अमन के नाम
अपनी-अपनी बयानबाजी,
भारत पाक से करते काम
अब तक कितने मंत्री आये,
बोले मसला सुलझेगा
पर न किसी ने है ये माना,
मसला और ही उलझेगा
क्या जनता कश्मीर की चाहे,
अब तक जान सका ना कोई
नेता सब कश्मीर के वैसे,
खुद का भला करें वो ही
'शिशु' दोस्तों क्या बोलूँ मैं,
खुद भी हूँ लाचार बड़ा.
गया नहीं कश्मीर आजतक,
पर जनता से प्यार बड़ा.
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