Monday, February 14, 2011

बाप पुलिश में डिप्टी साहब बेटा करता फेरा-फेरी....धत तेरे की!

धत तेरे की! 
पढ़ा लिखा होकर भी तू क्यों बेंच रहा झरबेरी,  
धत तेरे की! 

बाप पुलिश में डिप्टी साहब बेटा करता फेरा-फेरी, 
धत तेरे की! 

पूरे साल खूब मेहनत की, उस पर पाए धान पसेरी,
धत तेरे की! 

जब तक जिन्दा रहे ना पूछा अब मरे को दे रहे हलुआ-पूरी, 
धत तेरे की! 

हीरा के लड़के शीरा को तरसें 'शिशु' गदहे देखो खायं पंजीरी, 
धत तेरे की!

2 comments:

Rajeev Kumar said...

मस्त शिशु जी सही मारे हैं!
लिखते रहिये...कभी कभार पढता हूँ आनंद आता है!

Shishupal Prajapati said...

पद‍्म सिंह Padm Singh - प्यार करेंगे जल्दी जल्दी शादी मे क्यों करते देरी
धत तेरे की

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