लज्ज़ा, हया, शरम की बातें करना अब बेकार,
ज्य़ादा बात अगर की तूने तो पड़ जायेगी मार.
महिला सशक्तिकरण जपाकर पायेगा कुछ काम,
काम मिलेगा एनजीओ में मिलेगा अच्छा दाम.
आरक्षण की बात अगर हो हाँ-जी-हाँ-जी करना,
घर मी बीबी डांट पिलाए तो तू बिलकुल डरना.
ध्रूमपान करती हो महिला कभी ना करना विरोध,
महिला कितनी ही गुस्से में हो, तू ना करना क्रोध.
नहीं बहन जी कहना अब से मैडम जी तू बोल,
आंटी कहा किसी को तूने तो पड़ जायेगी धौल.
सुन्दर हो कहने से बच्चू अब नहीं चलेगा काम,
वाऊ सेक्सी, लूकिंग हाट ही कहना सुबहो शाम.
अंतरंग की बातें कुछ हैं 'शिशु' वो भी तुझे बताउँगा ,
पब्लिक प्लेस में नहीं, तुझे मैं आकर के समझाउंगा
Monday, September 13, 2010
Thursday, September 9, 2010
कहीं भिखारी के चक्कर में दूसरा ना पीसे जेल की चक्की.
सभी भिखारी आजकल करतब रहे हैं सीख,
करतब करके खेल में वे सब मांगेंगे भीख,
वे सब मांगेंगे भीख आजकल कपड़े रहे खरीद,
नए-नए परिधानों में सज भीख की देंगे रसीद,
'शिशु' कहें दिल्ली की पुलिश है आजकल हक्की-बक्की,
कहीं भिखारी के चक्कर में दूसरा ना पीसे जेलकी चक्की.
करतब करके खेल में वे सब मांगेंगे भीख,
वे सब मांगेंगे भीख आजकल कपड़े रहे खरीद,
नए-नए परिधानों में सज भीख की देंगे रसीद,
'शिशु' कहें दिल्ली की पुलिश है आजकल हक्की-बक्की,
कहीं भिखारी के चक्कर में दूसरा ना पीसे जेलकी चक्की.
अतिथि, आपको बुला रहा भारत में आओ..खेलो, देखो खेल, हमारे व्यंजन खाओ.
अतिथि, आपको बुला रहा भारत में आओ,
खेलो, देखो खेल, हमारे व्यंजन खाओ,
देखो, समझो, परम्पराएं मेरी,
आओ जल्दी करों न अब तुम देरी.
सभ्यता और संस्कृत से खुद जुड़ जाओ
सुन रखा था जैसा, वैसा ही सम्मान भी पाओ
भाई-चारा-बंधुत्व भाव मन लाये हैं
आपके आने में हम अपनी पलक बिछाए हैं
और हम भी सीखेंगे आपकी बोली-भाषा और गीत,
आप आयेंगे हमको याद भले ये पल जायेंगे बीत,
संगम होगा सभ्यता और संस्कारों का
ऊर्जा आयेगी एक-दूसरे के नए विचारों से
और भी बढ़ जायेगी मित्रता खेल के इसी बहाने से
प्यार आपस में होगा आपके आने से....
प्यार आपस में होगा आपके आने से....
प्यार आपस में होगा आपके आने से....
खेलो, देखो खेल, हमारे व्यंजन खाओ,
देखो, समझो, परम्पराएं मेरी,
आओ जल्दी करों न अब तुम देरी.
सभ्यता और संस्कृत से खुद जुड़ जाओ
सुन रखा था जैसा, वैसा ही सम्मान भी पाओ
भाई-चारा-बंधुत्व भाव मन लाये हैं
आपके आने में हम अपनी पलक बिछाए हैं
और हम भी सीखेंगे आपकी बोली-भाषा और गीत,
आप आयेंगे हमको याद भले ये पल जायेंगे बीत,
संगम होगा सभ्यता और संस्कारों का
ऊर्जा आयेगी एक-दूसरे के नए विचारों से
और भी बढ़ जायेगी मित्रता खेल के इसी बहाने से
प्यार आपस में होगा आपके आने से....
प्यार आपस में होगा आपके आने से....
प्यार आपस में होगा आपके आने से....
Tuesday, September 7, 2010
एक भिखारिन रोज़ सड़क पर खड़ी मांगती भीख...
एक भिखारिन सड़क पर मांग रही थी भीख,
छोटी बच्ची साथ में उसके, देती थी ये सीख-
कपड़े मैले पहन अरी ओ, आँख में आंसू आने दे,
बिना लिए पैसे हुजूर से बिल्कुल ना घर जाने दे,
बाबूजी-बाबूजी बोल, रोककर के दिखलाती जा,
माता जी भूखीं हूँ कल से, बातें नयी बनाती जा,
पकड़ हांथ में बैसाखी ये, लंगड़ी भी बन जाना,
गांठ बाँध ले बात हमारी भर दिन कुछ ना खाना!
'शिशु' ने उस बच्ची को एक दिन दौड़ लगाते पाया,
सोंचा ये इंसान की देन है या ईश्वर की माया!
Monday, September 6, 2010
खेल-खेल बस खेल ही रटती देखो खेलो की दीवानी
खेल दिखाएँगे हम ऐसे, तुम-सब रह जाओगे दंग,
और खेल में तुम-सब लोग सीख जाओगे ढंग
सीख जाओगे ढंग, बस रंग में भंग न करना
फिर भले खेल के बाद सभी देना धरने पर धरना
'शिशु' कहें शीला जी बोलती आजकल मीठी बानी
खेल-खेल बस खेल ही रटती देखो खेलो की दीवानी
और खेल में तुम-सब लोग सीख जाओगे ढंग
सीख जाओगे ढंग, बस रंग में भंग न करना
फिर भले खेल के बाद सभी देना धरने पर धरना
'शिशु' कहें शीला जी बोलती आजकल मीठी बानी
खेल-खेल बस खेल ही रटती देखो खेलो की दीवानी
Friday, August 20, 2010
नभ रंग वारे सो हमरे रखवारे हैं..
सीस जय गंगवारे, भूखन भुजंगवारे,
गौरी अर्धांगवारे, चंद दुतवारे हैं.
वृखाम तुरंगवारे, मरदन अनंगवारे,
अंड-बंग वृंगवारे, मुंडलाल धारे हैं.
महा मतवारे ज्यों दाता हैं अभंगवारे,
भूतन से संग वारे, नैन रतनारे हैं.
तान के तरंगवारे, डमरू अपंगवारे,
नभ रंग वारे सो हमरे रखवारे हैं.
गौरी अर्धांगवारे, चंद दुतवारे हैं.
वृखाम तुरंगवारे, मरदन अनंगवारे,
अंड-बंग वृंगवारे, मुंडलाल धारे हैं.
महा मतवारे ज्यों दाता हैं अभंगवारे,
भूतन से संग वारे, नैन रतनारे हैं.
तान के तरंगवारे, डमरू अपंगवारे,
नभ रंग वारे सो हमरे रखवारे हैं.
बात का कच्चा भंडुआ, नेद की कच्ची छिनारी..
जय बजरंग बली धजाधारी,
कसो लंगोट, उठाओ गदाभारी
खबर लो हमारी, सरन तिहारी
लंगोट का पक्का मर्द, औ सत की पक्की नारी
बात का कच्चा भंडुआ, नेद की कच्ची छिनारी..
जय बजरंग बली धजाधारी....
(शिवपूजन सहाय)
कसो लंगोट, उठाओ गदाभारी
खबर लो हमारी, सरन तिहारी
लंगोट का पक्का मर्द, औ सत की पक्की नारी
बात का कच्चा भंडुआ, नेद की कच्ची छिनारी..
जय बजरंग बली धजाधारी....
(शिवपूजन सहाय)
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