Monday, October 29, 2018

खुशी की कश्तियाँ मुझको अरे दे दो कोई लाकर।

बरसने की जरूरत थी, गरजने क्यों लगे आकर,
कोई आओ बताओ बादलों को बात ये जाकर।

मुसीबत में दुःखों के हर तरफ तूफ़ान दिखते हैं,
खुशी की कश्तियाँ मुझको अरे दे दो कोई लाकर।

वो पहने घूमता कुर्ता, दिलाया हमने उसको था,
हमारी नेकनियती की उसे कर दो खबर जाकर।

उसे करना था अच्छे काम उसको छोड़कर देखो,
लूटता अब खजाना है, गरीबों पर ज़ुलम ढाकर।

शहर केवल अमीरों का, गरीबों के लिए मुश्किल,
गुजारा कर रहे हमलोग, केवल रोटियाँ खाकर।।

Wednesday, October 24, 2018

रार, तक'रार और प्यार है पति-पत्नी की देन।

रार, तक'रार और प्यार है पति-पत्नी की देन।
फिर भी पत्नी पति की, पति पत्नी का फैन।!
पति ने कहा-
प्रिये मायके में तुम कुछ वक़्त गुजारो और।
मेरी चिंता मत करियो, यहाँ अमन सब ठौर।।
पत्नी ने भी पति को फिर भेज दिया संदेश!
दो घंटे में आ-जा सकती, रहती नहीं विदेश।।

हालात देश के ऐसे हैं, 'शिशुपाल' देख कर दंग।।

प्रमुख जजों में मनमुटाव है, सीबीआई में भी जंग।
हालात देश के ऐसे हैं, 'शिशुपाल' देख कर दंग।।
कोर कमेटी भंग हो गईं, जिम्मेदार न कोई है।
लगता है सरकार देश की ओढ़ रजाई सोई है।।
पाँच साल होने को हैं, लोकपाल का पता नहीं।
राजा बोल रहा जनता से मेरी कोई खता नहीं!!
अन्ना गायब, बाबा गायब, गायब सगरे नेता हैं।
मैं रैली में गया वहाँ था, कोई ख़बर न लेता है।।
आम आदमी पहले वाला, जूता मोजा धाँसे है।
दिल्ली की जनता को प्रतिदिन देता रहता झाँसे है।
सगरे: सभी
धाँसे: पहने

Thursday, October 18, 2018

छोटे घर में लोग बड़े दिल' वाले रहते हैं।

छोटे घर में लोग बड़े दिल' वाले रहते हैं।
अच्छे दिन आएंगें अरमां' पाले रहते हैं।।

भले अंधेरा घर में है पर औरों की खातिर,
घर के बाहर उनके सदा उजाल रहते हैं।

दरवाजे हैं खुले, भरोसा इतना चोरों पर,
कैद में घर के अंदर चाभी' ताले रहते हैं।।

आसमान को सकते जीत, इतना जज्बा है,
फिर भी पाँव आसमान के' खाले रहते हैं।।

Sunday, September 30, 2018

नज़र नज़र का फ़ेर, सबको कर दे ढेर।

नज़र नज़र का फ़ेर, सबको कर दे ढेर।😊

जिनने लूट अपना देश,
भाग गये परदेश।
बैंक आजकल खोज रहे,
बचे हुए अवशेष।।
😢
बैंक आधुनिक साहूकार,
अब चोर बन गए नेता हैं।
कर्ज ले रहा बड़ा आदमी
वापस कभी न देता है।।

पत्रकार हो महाप्रचारक,
मूढ़ बना हो जहाँ विचारक,
ऐसे देशों में घटनाएँ होंगी
सच में हृदय विदारक।
😊
खेल-खेल में जहाँ घोटाला,
लूटी तिजोरी लगा हो ताला।
कैसे रुकेगा ऐसे हाल में,
दुनियाँ भरका गड़बड़झाला।
😊
तड़ीपार जो कभी रहा था
देश भक्ति का ज्ञान दे रहा,
बेवकूफ मतदाता उसकी,
बातों पर भी कान दे रहा।।
😊

Friday, September 14, 2018

इतना अच्छा झूठ, कवि जी किससे सीखा है?

इतना अच्छा झूठ!
कविजी किससे सीखा है?
वाह, वाह की लूट!
कविजी किससे सीखा है?
अच्छा होता अच्छे कवि की
कुछ कविताएं पढ़ देते।
नई विधा में नव शब्दों के
नूतन छंद ही गढ़ देते।
सच कह देता है आलोचक
तब जाते तुम रूठ!
कविजी किससे सीखा है?
आह, वाह की लूट!
कविजी किससे सीखा है?

देशभक्ति की कविताओं में
नफरत भी फैलाते तुम।
रीतिकाल के छंदों में तो
मादकता भर लाते तुम।।
शेर, शायरी, गीतों में तब
क्यों जाती लय छूट!
कविजी किससे सीखा है?
वाह, वाह की लूट!
कवि जी, किससे सीखा है?

कवि मंचो पर झगड़ा-झाँसा
मोल भाव कर लेते हो,
वहाँ शेर जैसा दहाड़ते,
पब्लिक को डर देते हो।
नफरत के काँटे तक में
तुम घुसा रहे हो ठूँठ!
कवि जी किससे सीखा है?

इतना अच्छा झूठ!
कविजी किससे सीखा है?
वाह, वाह की लूट!
कविजी किससे सीखा है?

Sunday, September 2, 2018

इसलिए' पतंग से पेंच आजकल वो लड़ाने लगे हैं।

अजीबोगरीब ख़्वाब आजकल मुझे आने लगे हैं।
और हकीकत में सुबहो-शाम मुझे डराने लगे हैं।।

जिन्होंने पढ़ा नहीं कभी 'सामाजिक विज्ञान' 'शिशु'
वो समाज को 'समाज की परिभाषा' सिखाने लगे हैं!

सरेआम कत्लेआम का इल्जाम था जिन पर कभी,
वो 'इंसानियत' को 'अहिंसा का पाठ' पढ़ाने लगे हैं!

राजनीतिक 'दाँव-पेंच' का शौक जबसे चढ़ा है उन्हें,
तभी' वे आजकल 'पतंग' से पेंच लड़ाने लगे हैं!

बहुत उड़ाते थे दूसरों की खिल्ली 'सोशल मीडिया' में,
अब अपने पर आई तब 'कायदे-कानून' बनाने लगे हैं।

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