Thursday, February 5, 2009

होली के हुडदंग में उसने पीली कुछ ऐसी

होली के हुडदंग में उसने पीली कुछ ऐसी
होश गवां बाप से बेटा बोला तेरी ऐसी- तैसी

बिना पिए, कह देता हूँ इस बार नही रंग खेलूँगा
अब मै बच्चा रहा नही, इसलिए नही रंग खेलूँगा

ख़ुद विस्की पीकर खुश होते मुझे रंग की पुडिया
बेटा हूँ मै, बेटी कोई जो दिखलाते गुडिया

चल निकाल सौ सौ के नोट, दो अद्धे लाऊंगा
दे दस दस के खुल्ले नोट नमकीन भी लेता आऊंगा

होली में रंग का क्या लेना कीचड कब काम में आएगा
खालो - पीलो मौज मनालो साथ में कुछ न जाएगा

सुनकर ये बातें बेटे की बाप तुरत ही बोला
हाय! व्यर्थ जीवन में बीता, अब सच तूने बोला

जर जमीन जोरू जो है उसको जल्दी बिकवादे
अद्धे को तू मार दे गोली पूरी बोतल पिलवादे

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