Tuesday, April 21, 2009

जबसे मैंने नया जूता खरीदा है मेरी चाल बदल गयी है

जबसे मैंने नया जूता खरीदा है
मेरी चाल बदल गयी है
पर जमाने की चाल वही है
दोस्त कहते हैं कि
मैं बायें पैर पर ज्यादा वजन डालने लगा हूं।
बात यह है कि
दाहिने पैर की तकलीफ टालने लगा हूं।
(सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता जूता-2 से साभार)

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