Thursday, June 25, 2009

तुम काम के हो मेरे तुम मांगलो इनाम

तुमने मेरा नाम किया खूब बदनाम
तुम काम के हो मेरे तुम मांगलो इनाम

तुम सत्य बोलते रहे तुम सत्य के गुलाम
मैं झूठ बोल जीत गया तुमको मेरा सलाम

तुम घूम - घूम कर करते रहे प्रचार
मैं भरी भीड़ बोला बस हो गया प्रचार

तुम जेल से हो डरते तुम्हे जेल का मलाल
मैं जेल जैसे पहुँचा बस हो गया कमाल

पहचान जाओगे अगर मैं कौन हूँ क्या नाम?
लिखकर मुझे बताना बस लिखना मेरा काम

2 comments:

‘नज़र’ said...

भाई बहुत बढ़िया है

नीरज गोस्वामी said...

नहीं पहचान पाए प्रजापति जी हो न हो कोई नेता ही होना चाहिए लेकिन जब अस्सी प्रतिशत नेता आपके द्वारा दिए गए माप डंडों पर खरे उतर रहे हों तो किसी एक का नाम कैसे लें...?

नीरज