Tuesday, July 7, 2009

शहरी गरीब को दो कोटा उनकी अब बारी आयी है...

जाति-पांति अब है नहीं, हाँ केवल दलित कहाते
कोटे के अन्दर देखो अब निर्धन ब्राम्हण भी आते

बात एक सीधे सी है है तर्क भी सीधासाधा
आधा जो दलित कहाते हैं बाकी ब्राम्हण का है आधा

बाकी कोई बचा नहीं इससे, हाँ कुछ लोग हाय-तोबा करते
वो भी बन जायेंगे दलित कुछ नेता वादा हैं करते

कोटे की सब माया भाई, कोटे से बाहर हो ना कोई
कोटे पर गोटे फिट बैठें यह सोच रहे हैं सब कोई

हो गए बरस नौ-आठ-सात महिला कोटे में ना आयी
तैंतीस या पैंतीस जो भी हो उसकी बारी है ना आयी

इस बार सुना है कोटे में सस्ता अनाज मिल पायेगा
पीले कारट वाला जो है 'कोटे' का लाभ उठाएगा

कोटा-कोटा था शोर मचा हो गया इलेक्शन भी कोटा
जो दल पहले था जितना लम्बा इस बार हुआ उतना छोटा

इसलिए आज से 'शिशु' ने भी कोटे पर बात उठाई है
शहरी गरीब को दो कोटा उनकी अब बारी आयी है

1 comment:

‘नज़र’ said...

लाजवाब कर देने वाली रचना है,

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शिशु भाई आपकी एक नज़र की आवश्यकता है
नये प्रकार के ब्लैक होल की खोज संभावित