मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नही होती*
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नही होती
गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नही होती
बैठे-बिठाये पकड़े जाना-बुरा तो है
सहमी सी चुप में जकड़े जाना-बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नही होता
कपट के शोर में -
सही होते हुए भी दब जाना-बुरा तो है
किसी जुगनू के लौ में पढ़ना-बुरा तो है
मुट्ठियाँ भींचकर वक्त निकाल देना-बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नही होता
सबसे ख़तरनाक होता है-
मुर्दा शान्ति से मर जाना
न होना तड़प का, सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौट कर घर आना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना
*यह कविता विश्व विख्यात कवि श्री अवतार सिंह संधू 'पाश' (जिनकी खालिस्तान के उग्रवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी) के कविता संग्रह से ली गयी है!
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Popular Posts
-
तुम कहते हो, तुम्हारा कोई दुश्मन नहीं है, अफसोस? मेरे दोस्त, इस शेखी में दम नहीं है जो शामिल होता है फर्ज की लड़ाई मे, जिस बहादुर लड़ते ही हैं...
-
नौकरी के नौ काम दसवां काम हाँ हजूरी फिर भी मिलती नही मजूरी पूरी मिलती नही मजूरी जीना भी तो बहुत जरूरी इसीलिये कहते हैं भइया कम करो बस यही जर...
-
हमने स्कूल के दिनों में एक दोहा पढ़ा था। जो इस प्रकार था- धन यदि गया, गया नहीं कुछ भी, स्वास्थ्य गये कुछ जाता है सदाचार यदि गया मनुज का सब कु...
-
रविवार की एक घटना बात उन दिनों की है जब मैं 8वीं जमात में पढ़ता था। यह सन 1992 और 6 दिसम्बर की एक छोटी सी घटना है। मेरा विद्यालय लखनऊ शहर के...
-
बाबा ने फिरसे दिखलाई अपनी कुछ करतूत, भोली-भली जनता फंस रही, गए सयाने छूट. बाबा धर्माचारी है ये, अग्नि परीक्षा पास हुए, नए-पुराने भक्त आज...
-
I can confidently say that religion has never been an issue in our village. Over the past 10 years, however, there have been a few changes...
-
भारत में बाल संरक्षण केवल नीतियों का विषय नहीं है , बल्कि यह एक गहन सामाजिक , सांस्कृतिक और स्थानीय संदर्भों से जुड़ी चुनौती है। यद्यपि ...
-
कौन है देशी कौन विदेशी अब ये चर्चा करता कौन, माल विदेशी सभी खरीदें उस खर्चे पर सब मौन। क्रिकेट विदेशी खेल कभी था अभी देश का है सिरमौर, इंग्ल...
-
इंतज़ार है पक्का शत्रु, उस पर कर न यकीन जीना शान से चाह रहे तो ख़ुद को समझ न दीन ख़ुद को समझ न दीन काम कल पर ना छोड़ो लगन से करके काम दाम फल स...
-
भाँग, धतूरा, गाँजा है, माचिस, बीड़ी-बंडल भी। चिलम, जटाएँ, डमरू है, कर में लिए कमंडल भी।। गंगाजल की चाहत में क्यूँ होते हलकान 'शिश...
आंदोलन
यह बात सन 1994 की है। उस समय मैं लखनऊ के एक आवासीय विद्यालय में 9वीं कक्षा में पढ़ता था। एक दिन हॉस्टल में बच्चों को खराब खाना परोसे जाने को...
-
तुम कहते हो, तुम्हारा कोई दुश्मन नहीं है, अफसोस? मेरे दोस्त, इस शेखी में दम नहीं है जो शामिल होता है फर्ज की लड़ाई मे, जिस बहादुर लड़ते ही हैं...
-
नौकरी के नौ काम दसवां काम हाँ हजूरी फिर भी मिलती नही मजूरी पूरी मिलती नही मजूरी जीना भी तो बहुत जरूरी इसीलिये कहते हैं भइया कम करो बस यही जर...
-
हमने स्कूल के दिनों में एक दोहा पढ़ा था। जो इस प्रकार था- धन यदि गया, गया नहीं कुछ भी, स्वास्थ्य गये कुछ जाता है सदाचार यदि गया मनुज का सब कु...
3 comments:
बहुत अच्छी कविता पढ़वायी! शुक्रिया!
"वियोगी होगा पहला कवि
आह से उपजा होगा गान
निकल कर नयनों से चुपचाप
बही होगी कविता अनजान"
wah wah
Sachmuch.
Think Scientific Act Scientific
Post a Comment