Friday, August 21, 2009

सबसे ख़तरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नही होती*
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नही होती
गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नही होती

बैठे-बिठाये पकड़े जाना-बुरा तो है
सहमी सी चुप में जकड़े जाना-बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नही होता

कपट के शोर में -
सही होते हुए भी दब जाना-बुरा तो है
किसी जुगनू के लौ में पढ़ना-बुरा तो है
मुट्ठियाँ भींचकर वक्त निकाल देना-बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नही होता

सबसे ख़तरनाक होता है-
मुर्दा शान्ति से मर जाना
न होना तड़प का, सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौट कर घर आना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना

*यह कविता विश्व विख्यात कवि श्री अवतार सिंह संधू 'पाश' (जिनकी खालिस्तान के उग्रवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी) के कविता संग्रह से ली गयी है!

3 comments:

विनय ‘नज़र’ said...

बहुत अच्छी कविता पढ़वायी! शुक्रिया!

Rajesh Mishra said...

"वियोगी होगा पहला कवि
आह से उपजा होगा गान
निकल कर नयनों से चुपचाप
बही होगी कविता अनजान"

wah wah

कविता said...

Sachmuch.
Think Scientific Act Scientific