Sunday, February 14, 2010

अब द्विज, क्षत्रिय सूद्र कौन है, बनिया कौन कहाता

अब द्विज, क्षत्रिय सूद्र कौन है, बनिया कौन कहाता
मिल जाए बस कोटा हमको हर कोई यही चाहता
कोटा वो भी तैंतीस प्रतिशत, इससे कममें बात नहीं
हो जाएँ कोटे में शामिल फिर मेरी कोई जात नहीं
कर देंगे हड़ताल यदि नहीं मिला ढंग का कोटा
हम है बड़े बहादुर सुनलो नहीं समझाना छोटा
बोल रहे ये बढ़-बचन जाति के जो सब ठेकेदार
बोल रहे जल्दी दे कोटा, है परेशान सरकार
'शिशु' न कोटा हमें चाहिए हम है कोटेदार
देल्ली में कर रहा नौकरी छोड़छाड़ घरद्वार

4 comments:

अनामिका की सदाये...... said...

bahut badhiya kataaksh.

Udan Tashtari said...

सटीक कटाक्ष!

Ajay Tripathi said...

भ!रत पुरे विश्व में एक मात्र देस है जहा संस्कृति में इतने भेद होकर भी सब भाई भाई है .............................. जब तक ये राजनितिज हमें न ब!टे ये राजनीती ही तो हमें छोटे छोटे टुकड़ो में आराक्चन के लाली पॉप दिखा आपस में बाट रही है सार्थक चिन्तन के लिए साधुवाद अजय त्रिपाठी

aarkay said...

" कुछ कह न सके कुछ कह भी गए
कहते कहते कुछ रह भी गए "

बहुत ठीक फ़रमाया जनाब ने !