Thursday, February 3, 2011

...लखटकिया में बैठा मानुष 'शिशु' को दिखलाता है ताव.

इंग्लिश बोली वाले सारे घुस गए हाल के अन्दर,
हिन्दी भाषी अरे बिचारे! देख रहे बन बन्दर. 

सभी जगह ही इंग्लिश बोली वाले हैं अधिकारी, 
हाय! शिशु! हिन्दी भाषी ही नौकर हैं नर नारी.  

जैसे फिक्स मैच पहले से उसी तरह होते कुछ जॉब, 
जान समझ कर अप्प्लाई कर सुन ले ओ महताब. 

ह्युमन राईट्स, इक्वालिटी जो जेंडर सदा बोलते, 
वो ही सारे सामाजिक हैं भेद जो सभी खोलते.  

जब से कार आयी लखटकिया कार को देता ना कोई भाव,
पर लखटकिया में बैठा मानुष 'शिशु' को दिखलाता है ताव.

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