Wednesday, December 17, 2008

आम आदमी - एक कटु परिभाषा

सामान्यतः आम आदमी खाने-पीने, बच्चे पैदा करने और सोने की मूल प्रक्रिया में ही अपना सारा जीवन बिताते हैं। सामान्य लोग शक्ति के शोषण, करोबारी मामलों, धोखेबाजी और जालसाजी से इन प्रक्रियाओं की समतल धारा को सुनिश्चित करता है। सामान्य लोग पौष्टिक भोजन खा खा कर दूसरों के प्रति निर्दयी और निष्ठुर होते हुए धार्मिक विनम्रता में जीवन बिताते हैं।

आमलोग मंगल या शनिवार को मांस नहीं खाते और मंगल एवं शनिवार को मंदिर जाते हैं ताकि भगवान के सामने अपने कटु और पापी जीवन का रोना रोयें। और भगवान से क्षमा याचना कर सकें। आमतौर पर ये लोग व्रत रखते हैं। तांत्रिक या गुरू से पाप दूर करने के लिए शिक्षा लेते। प्रसाद बांटते। जबकि यही लोग लगातार उन लोगों के शरीर पर अत्याधिक काम का बोझ डालते और उनका खून चूसते जो सामान्य जीवन की पुष्टि और समृद्धि के लिए काम कर रहे होते हैं। सामान्य लोगों के पास पूर्वाग्रहों और अंधविश्वासों का अपना एक छोटा मगर पवित्र भंडार रहता है। आत्मरक्षा की इस समस्त सामग्री को भगवान और शैतान सारहीन विश्वास तथा मानव बुद्धि के प्रति कुंठित अविश्वास से जोड़ देते हैं।

दूसरी बात यह जो लोग देखने में भोलेनाथ लगते हैं उनका यह भोलापन ढोंग हो सकता है। जो उनकी बुद्धि के लिए परदे का काम करती है जिससे वे स्वयं सामान्य लोग जीवन में काम लेते हैं।

(यह कटु परिभाषा गोर्की के निबंध ‘लेखनकला और रचना कौशल’ से ली गयी है)

इस लेख से यदि किसी व्यक्ति की धार्मिक या व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को ठेंस लगाती है तो लेखक उसका जिम्मेदार नही है।

2 comments:

विनय said...

बहुत बढ़िया लिखा, अच्छा लगा कि ब्लाग लिख रहे हो!

Amit said...

बहुत सही कहा है आपने ....