Wednesday, March 25, 2009

जिप्पी बोला पापा से मैं विदेश ही जाऊँगा

जिप्पी बोला पापा से मैं विदेश ही जाऊँगा
रोटी खाकर तंग आ गया अब पीजा ही खाऊँगा

एक तो पैसा यंहा नही है दूजे लोग मतलबी
बस जाऊंगा मैं विदेश में आऊंगा मैं कभी कभी

नाजी नाजी मैं न करता अपने देश कभी शादी
वहीं करूँगा गोरी से ही भले उम्र बीते आधी

बचपन से ही लगन लगी थी इसलिए नही मैं पढ़ पाया
कैसे हो विदेश जाना इसलिए गाँव से मैं आया

यंहा भले कुछ काम कराओ पर ऐसा उपाय कर दो
पैसा जो भी लगे लगाओ पर वीजे का उपाय कर दो

पता नही क्यूँ वीजा लगता अब तक मैं विदेश होता
दिन में मस्ती खूब मचाता और रात को जीभर सोता

2 comments:

रंजना said...

वाह ! वाह ! वाह !
आनंद आ गया.....बहुत सटीक लिखा आपने...करारा व्यंग और बहुत ही प्रभावी शब्द रचना...सुन्दर कविता....

संगीता पुरी said...

वाह !! बहुत सुंदर रचना।