Monday, October 13, 2008

तुम कहते हो, तुम्हारा कोई दुश्मन नहीं है,अफसोस? मेरे दोस्त, इस शेखी में दम नहीं।जो शामिल होता है फर्ज की लड़ाई मे,जिस बहादुर लड़ते ही हैं, उसके दुश्मन होते ही हैंअगर नहीं है तुम्हारे, तो वह काम ही तुच्छ हैं, जो तुमने किया है,तुमने किसी गद्दार के कूल्हे पर वार नहीं किया है।

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